Archive for the ‘Poem’ Category

मृत्युदंड

November 11, 2009 | In: Poem

[अभिभावक] हाय ! भाग्य में ही आया; क्यों मेरे यह मृत्युदंड || सूखता है कंठ मेरा; जब सुना हैं मृत्युदंड|...